

"चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं। 2020 की गलवान झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है, जो कूटनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।"
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है। वर्ष 2019 के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा और 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद यह पहली बार होगा जब चीनी राष्ट्रपति भारतीय भूमि पर कदम रखेंगे। यह दौरा न केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हिस्सा है, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच भविष्य के कूटनीतिक संबंधों के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
गलवान संघर्ष के बाद से ही भारत और चीन के संबंधों में भारी तनाव रहा है, जिसका सीधा असर व्यापार, निवेश और सीमा सुरक्षा पर पड़ा है। हालांकि, हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ताएं फिर से शुरू हुई हैं। अगस्त में हुई 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता और चीन के हालिया सकारात्मक बयानों से संकेत मिलता है कि दोनों देश अब टकराव के बजाय नियंत्रित सहयोग और प्रतिस्पर्धा की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
इस दौरे का सबसे अहम पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित द्विपक्षीय वार्ता है। यदि यह बैठक होती है, तो यह सीमा विवाद के समाधान और आर्थिक संबंधों में आ रही बाधाओं को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। भारत फिलहाल संवेदनशील क्षेत्रों में चीनी निवेश और तकनीक को लेकर सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरत रहा है, जिसे इस समिट के दौरान चर्चा का मुख्य विषय बनाया जा सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक दौरे से सीमा विवाद पूरी तरह हल नहीं होगा। भारत और चीन के बीच भरोसे की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह दौरा इस बात का संकेत हो सकता है कि दोनों देश अब मतभेदों के बावजूद कूटनीतिक संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। BRICS समिट में जिनपिंग की उपस्थिति को रिश्तों के पूरी तरह सामान्य होने के बजाय, एक 'प्रबंधित संबंधों' की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए।





