

"पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने पुरुलिया में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुर्मी आंदोलन से जुड़े सभी पुराने मामले वापस लेने का बड़ा ऐलान किया है।"
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने पुरुलिया में आयोजित कुर्मी समुदाय के करम पर्व कार्यक्रम के दौरान आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कुर्मी आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी मुकदमों को वापस लिया जाएगा। सरकार के इस फैसले से समुदाय के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार कुर्मी समुदाय से किए गए अपने सभी वादों को पूरी तरह से पूरा करेगी। समुदाय के विकास को गति देने के लिए इस साल के बजट में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि आने वाले समय में इस विकास राशि को और बढ़ाया जाएगा तथा कुर्मी विकास बोर्ड को दोबारा सक्रिय किया जाएगा।

बता दें कि कुर्मी समुदाय ने पिछले साल पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में अपनी मांगों को लेकर सड़क और रेल नाकेबंदी जैसा बड़ा आंदोलन किया था। समुदाय की प्रमुख मांगों में अनुसूचित जनजाति यानी एसटी का दर्जा देना और कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराना प्रमुख रूप से शामिल था। सरकार के इस नए कदम को इन सियासी और सामाजिक मांगों को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने का बड़ा दावा किया है। हालांकि, यह अभी सरकार की ओर से दिया गया आश्वासन और प्रक्रिया से जुड़ा बयान है, और इन दोनों भाषाओं का आठवीं अनुसूची में शामिल होना अभी पूरा नहीं हुआ है। इस घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।




