

"तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बारुईपुर में दुष्कर्म पीड़िता से मिलने जाने से रोकने के लिए उनके आवास के बाहर केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है, जिसे पार्टी ने लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया।"
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार को उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्र सरकार पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आवाजाही बाधित करने का गंभीर आरोप लगाया। टीएमसी का दावा है कि ममता बनर्जी को दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में एक कथित दुष्कर्म पीड़िता के परिवार से मिलने जाने से रोकने के लिए उनके कालीघाट स्थित आवास के बाहर केंद्रीय बलों की तैनाती की गई।
पार्टी की वरिष्ठ सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री को "हाउस अरेस्ट" जैसी स्थिति में रखा गया है। उन्होंने लिखा, "सात बार की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री और तीन बार की मुख्यमंत्री को एक पीड़िता से मिलने जाने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यह शर्मनाक है।"
वहीं, टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि कालीघाट स्थित ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर केंद्रीय बलों द्वारा रूट मार्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तैनाती का एकमात्र मकसद दोनों नेताओं की आवाजाही पर रोक लगाना और उन्हें घरों तक सीमित रखना है।
इन आरोपों के बाद राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक केंद्र सरकार, केंद्रीय सुरक्षा बलों या भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। साथ ही, ममता बनर्जी को औपचारिक रूप से 'हाउस अरेस्ट' किए जाने की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह मामला टीएमसी नेताओं के आरोपों और सोशल मीडिया पर साझा किए गए दावों तक ही सीमित है।
No similar articles found.