

"झारखंड के गढ़वा जिले में बाघ की दस्तक और हाथियों के हमलों से ग्रामीण दहशत में हैं, पिछले चार दिनों में दो लोगों की जान जा चुकी है।"
झारखंड के गढ़वा जिले में जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। रंका, भंडरिया, चिनिया, बड़गढ़ और रमकंडा के जंगलों में बाघ और हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। पिछले कुछ दिनों में बाघ ने आधा दर्जन से अधिक मवेशियों का शिकार किया है, जिससे लोगों के बीच यह डर बैठ गया है कि कहीं बाघ आबादी वाले इलाकों की ओर रुख न कर ले।
वन विभाग ने जंगल में बाघ के पगमार्क मिलने के बाद पुष्टि की है कि क्षेत्र में बाघ मौजूद है। गढ़वा के डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम ने बताया कि भंडरिया और बलीगढ़ जैसे इलाकों से भी बाघ के देखे जाने की सूचनाएं मिली हैं। विभाग की टीमें लगातार जंगल में सर्च अभियान चला रही हैं और वन्यजीवों की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखी जा रही है ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित रखा जा सके।

बाघ के अलावा हाथियों का खतरा भी सिर चढ़कर बोल रहा है। पिछले चार दिनों के भीतर रंका और चिनिया क्षेत्र में जंगली हाथियों ने दो लोगों को कुचलकर मार डाला, जिससे स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है। विरोध स्वरूप ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन भी किया। हाथियों और बाघ के दोहरे संकट ने वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
वन विभाग ने स्थानीय निवासियों के लिए अलर्ट जारी करते हुए सुबह और शाम के समय जंगल की ओर न जाने की सख्त सलाह दी है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल में अकेले न जाएं और किसी भी वन्यजीव के दिखने या संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी टीमों को तैनात किया गया है ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके।



