

"झारखंड के गढ़वा जिले के रमकंडा-भंडरिया जंगलों में बाघ के पगमार्क मिले हैं, जिससे वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है।"
झारखंड के गढ़वा जिले में स्थित जंगलों से एक सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहाँ पलामू टाइगर रिजर्व से सटे रमकंडा और भंडरिया के वन क्षेत्रों में बाघ की मौजूदगी के स्पष्ट संकेत मिले हैं। ग्रामीणों द्वारा दी गई सूचना और पगमार्क के मिलने के बाद वन विभाग पूरी तरह से सतर्क हो गया है और इलाके में सुरक्षा व निगरानी की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ कर दिया गया है।
शुक्रवार को वन अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर पगमार्क का बारीकी से निरीक्षण किया, जिसके बाद बाघ की गतिविधि की आधिकारिक पुष्टि की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले मवेशियों के शिकार की घटनाओं ने भी इस इलाके में किसी बड़े हिंसक वन्यजीव के होने के संकेत दिए थे, जिसे अब बाघ की मौजूदगी के रूप में पहचाना जा रहा है।

बाघ की सटीक लोकेशन और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। डीएफओ एवन अंजुम अबरार ने बताया कि संभावित रास्तों पर ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि बाघ की स्पष्ट तस्वीर और मूवमेंट का पता लगाया जा सके। हालांकि, अभी तक यह जानवर किसी भी कैमरे में कैद नहीं हुआ है, लेकिन वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं।
जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के बीच बाघ की खबर से भारी चिंता का माहौल है। वन विभाग ने स्थानीय लोगों को जंगलों में अकेले न जाने और सावधानी बरतने की सलाह दी है। फिलहाल, प्रशासन की प्राथमिकता बाघ को सुरक्षित तरीके से ट्रैक करना और इंसानी बस्तियों से उसे दूर रखना है ताकि किसी भी अनहोनी को रोका जा सके।





