

"बिहार के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मोकामा विधायक अनंत सिंह को बड़ा झटका देते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी है और उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है।"
बिहार के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में मोकामा विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट से मिली उनकी जमानत को रद्द करते हुए अनंत सिंह को आगामी 1 दिसंबर तक संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का सख्त आदेश दिया है। इस फैसले के बाद एक बार फिर मोकामा विधायक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं और उन्हें दोबारा जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ सकता है।
यह पूरा मामला पटना हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है जिसमें 19 मार्च को अनंत सिंह को जमानत दी गई थी। इस फैसले के खिलाफ मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती दी थी। सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने यह अहम फैसला सुनाया है।

अदालत ने अपने आदेश में बिहार पुलिस को इस मामले की जांच आगामी चार महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश भी दिया है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमानत देते समय अपराध की गंभीरता और आरोपी के पुराने आपराधिक इतिहास पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया था। गौरतलब है कि 30 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी।
कानूनी झटकों के बीच अनंत सिंह की राजनीतिक मुश्किलें भी लगातार गहरी होती जा रही हैं। हाल ही में जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों और एमएलसी चुनाव में रुख के चलते अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी दोनों को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब अनंत सिंह को हर हाल में 1 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा और बिहार पुलिस को चार महीने में अपनी जांच पूरी करनी होगी।






