

"दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए पीजी बिल्डिंग हादसे में पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। कोर्ट ने तीन आरोपियों को दो दिन की हिरासत में भेज दिया है।"
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी बिल्डिंग गिरने के मामले में पुलिस की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले के तीन मुख्य आरोपियों—बिल्डिंग मालिक के बेटे महेश गुप्ता, पीजी संचालक सुधांशु और ठेकेदार सानोज कुमार—को दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट कौतुक भारद्वाज ने यह आदेश तब जारी किया, जब पुलिस ने पूछताछ के लिए आरोपियों की रिमांड की मांग की थी।
जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस अब इस बात पर है कि इमारत के रखरखाव, अवैध निर्माण और पीजी संचालन में इन तीनों की व्यक्तिगत भूमिका क्या थी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इमारत में कोई असुरक्षित मरम्मत कार्य किया जा रहा था जिसके कारण यह हादसा हुआ। पुलिस की पूछताछ से मिली जानकारी भविष्य की कानूनी कार्रवाई के लिए निर्णायक साबित होगी।
इस मामले में पहले ही कड़ी कार्रवाई करते हुए कोर्ट ने 7 सितंबर को बिल्डिंग के मालिक हरिराम गुप्ता और उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अब पुलिस महेश गुप्ता, सुधांशु और सानोज से आमने-सामने पूछताछ कर यह समझने की कोशिश करेगी कि अगस्त 2025 में लीज पर दी गई इस इमारत का प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी मानक किस स्तर पर नजरअंदाज किए गए थे।
गौरतलब है कि 6 सितंबर को हुए इस भीषण हादसे में 7 लोगों की जान चली गई थी, जबकि मलबे से कई अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। इस घटना के बाद से ही शहर में अवैध निर्माण और असुरक्षित पीजी के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब पुलिस की विशेष टीम हादसे के लिए जिम्मेदार सभी पहलुओं की तहकीकात कर रही है ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी को रोका जा सके।





