

"लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बागी TMC सांसदों को अयोग्यता याचिकाओं पर जवाब देने के लिए 22 सितंबर तक का अतिरिक्त समय दिया है।"
तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए 20 सांसदों को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से बड़ी राहत दी गई है। अध्यक्ष ने अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं पर इन सांसदों को अपना पक्ष रखने के लिए 22 सितंबर तक की मोहलत प्रदान की है। इससे पहले लोकसभा सचिवालय ने 25 अगस्त को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा था।
पूरे विवाद की जड़ अभिषेक बनर्जी द्वारा 18 जून को लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दाखिल की गई वे याचिकाएं हैं, जिनमें दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत इन 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है। सांसदों ने नोटिस का विस्तृत जवाब तैयार करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा था, जिसे स्वीकार करते हुए अध्यक्ष ने अब नई समय सीमा निर्धारित कर दी है।
NCPI में शामिल हुए इन सांसदों का दावा है कि वे पार्टी से अलग होकर एक नया समूह बनाने के हकदार हैं और उन्होंने सदन में इसे मान्यता देने की मांग भी की है। वहीं, टीएमसी नेतृत्व का तर्क है कि सांसदों का यह कदम सीधे तौर पर दलबदल विरोधी कानून का उल्लंघन है। इसी आधार पर अभिषेक बनर्जी ने सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए लोकसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता समाप्त करने की गुहार लगाई है।
यह मामला केवल लोकसभा अध्यक्ष के पास ही नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक भी पहुँच चुका है। अदालत ने भी पिछले दिनों इन सांसदों को नोटिस जारी किया था, जिससे मामले की गंभीरता बढ़ गई है। अब 22 सितंबर की तारीख बेहद अहम हो गई है, क्योंकि उसी दिन सांसदों का जवाब दाखिल होने के बाद इस राजनीतिक खींचतान का अगला चरण तय होगा।

