

"सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए RBI और राज्यों को कड़े निर्देश दिए हैं। अब म्यूल बैंक खातों पर कार्रवाई और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया तेज होगी।"
देशभर में तेजी से बढ़ रहे 'डिजिटल अरेस्ट' और साइबर ठगी के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सभी राज्यों को साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।
न्यायालय ने RBI को चार सप्ताह के भीतर म्यूल (Mule) बैंक खातों और धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले खातों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने का आदेश दिया है। अदालत का मानना है कि इन खातों पर समयबद्ध कार्रवाई से अपराधों में भारी कमी आएगी।
इसके अलावा, कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को e-Zero FIR प्रणाली को प्रभावी बनाने और पीड़ितों की रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए कहा है। केंद्र सरकार को साइबर ठगी के पीड़ितों को मुआवजा देने और साझा दायित्व (Shared Liability) पर विचार करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने जानकारी दी कि अब तक 57 बैंकों और राज्यों के सहयोग से 36,290 मामलों में पीड़ितों को कुल 18.05 करोड़ रुपये वापस दिलाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस पहल से भविष्य में साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा तंत्र तैयार होने की उम्मीद है।





