

"उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। समीकरणों के लिहाज से बीजेपी के 8 और सपा के 2 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।"
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राज्य की 10 राज्यसभा सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने आठ उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर से दो प्रत्याशियों ने पर्चा भरा है। मौजूदा विधानसभा के राजनीतिक समीकरणों और संख्या बल के आधार पर यह लगभग तय माना जा रहा है कि बीजेपी के आठों और सपा के दोनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे।
इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अचानक दिल्ली रवाना होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव सुबह करीब आठ बजे दिल्ली के लिए रवाना हुए, जहां उनके विपक्षी दलों की बैठकों और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना है। उनकी इस दिल्ली यात्रा को आगामी राज्यसभा चुनाव और INDIA गठबंधन की रणनीतियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

सपा के सामने इस चुनाव में अपने दोनों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के साथ-साथ पार्टी के आंतरिक राजनीतिक हितों को साधने की बड़ी चुनौती है। नामांकन प्रक्रिया के बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बैठकों और रणनीतिक मंथन का दौर लगातार जारी है। बीजेपी के पास जहां मजबूत संख्या बल है, वहीं विपक्षी दल भी अपने विधायकों के समर्थन और एकजुटता को बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
फिलहाल राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यूपी की सभी 10 सीटों पर चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से निर्विरोध संपन्न होगा या नामांकन वापसी के अंतिम समय में कोई नया सियासी मोड़ सामने आएगा। अखिलेश यादव के दिल्ली दौरे और विपक्षी रणनीतियों के बाद राज्य में राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना है।
