

"बिहार के शिक्षा संगठनों को एक मंच पर लाने के लिए प्रशांत किशोर ने बड़ी कवायद शुरू कर दी है। सातवें वेतनमान समेत शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगों को लेकर संघर्ष तेज करने की तैयारी की जा रही है।"
बिहार के शिक्षा जगत में इन दिनों राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर एक बड़ा दांव चला है। राज्य के विभिन्न शिक्षक संगठन अब अपनी आवाज को और बुलंद करने के लिए एक ही मंच पर आने की तैयारी कर रहे हैं।
शिक्षकों की मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगें सामने आई हैं, जिसमें सबसे प्रमुख मांग सातवें वेतनमान को पूरी तरह से लागू करना है। इन संगठनों का मानना है कि जब तक सभी शिक्षकों को उनका हक नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह संघर्ष और अधिक आक्रामक रूप लेगा।

प्रशांत किशोर की इस पहल से बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि राज्य के तमाम शिक्षक संघ एकजुट हो जाते हैं, तो यह आगामी राजनीतिक समीकरणों को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है।
आने वाले दिनों में इस मुहिम के तहत सरकार पर दबाव बनाने के लिए बड़े स्तर पर प्रदर्शन और आंदोलनों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। देखना यह होगा कि प्रशासन शिक्षकों की इन ज्वलंत समस्याओं पर क्या प्रतिक्रिया देता है।





