

"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2026 के BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर सकारात्मकता जताई है। उन्होंने संस्कृत के माध्यम से संवाद और सहयोग की महत्ता पर जोर दिया है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में आयोजित होने वाले BRICS 2026 शिखर सम्मेलन के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दुनिया भर के नेताओं का स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि यह मंच वैश्विक कल्याण और सार्थक चर्चाओं के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। पीएम मोदी के अनुसार, भारत इस आगामी समिट के लिए पूरी तरह तैयार है, जो कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस संदेश की सबसे बड़ी विशेषता प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत का एक श्लोक है। उन्होंने 'सज्जनों के साथ ही संवाद और मित्रता' का मंत्र दिया है, जिसका अर्थ है कि सहयोग और बातचीत हमेशा सदाचारी और अच्छे आचरण वाले लोगों के साथ होनी चाहिए, जबकि अनुचित व्यवहार करने वालों से दूरी बनाए रखना ही श्रेयस्कर है। यह संदेश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की नैतिक और स्पष्ट विदेश नीति को दर्शाता है।

भारत वर्तमान में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 2026 का सम्मेलन नई दिल्ली के लिए एक बड़ी कूटनीतिक प्राथमिकता है। इस मंच के माध्यम से भारत लगातार ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक पटल पर मजबूती से रखने और विकासशील देशों के हितों की रक्षा करने पर जोर देता रहा है। प्रधानमंत्री का यह रुख स्पष्ट करता है कि भारत इस समूह को एक सकारात्मक और सहयोगात्मक मंच के रूप में विकसित करना चाहता है।
BRICS का विस्तार होने के बाद वैश्विक स्तर पर इसकी भूमिका और अधिक प्रभावी हो गई है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में होने वाला आगामी सम्मेलन न केवल आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक शासन, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे जटिल विषयों पर चर्चा का प्रमुख केंद्र भी बनेगा। प्रधानमंत्री मोदी का यह आह्वान वैश्विक नेताओं के बीच आपसी विश्वास और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।





