

"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें ग्लोबल साउथ की भूमिका और वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर जोर दिया गया।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह उच्च-स्तरीय वार्ता 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि में आयोजित की गई, जो वर्तमान में वैश्विक राजनीति और कूटनीति के केंद्र में है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस चर्चा को 'शानदार' बताते हुए साझा किया कि इसमें भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता, बहुपक्षवाद को मजबूत करने और संयुक्त राष्ट्र में आवश्यक सुधारों जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई।
भारत के दृष्टिकोण से यह मुलाकात बेहद अहम है क्योंकि वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों, विशेष रूप से 'ग्लोबल साउथ' की आवाज को मुखर करने की दिशा में भारत एक प्रमुख नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा है। मोदी ने गुटेरेस के समक्ष संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं के पुनर्गठन की मांग को दोहराया ताकि विकासशील राष्ट्रों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। यह चर्चा उस समय हुई है जब दुनिया भर के कई प्रमुख नेता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली में एकत्र हो रहे हैं।

कूटनीतिक गलियारों में इस बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठकों की कड़ी का हिस्सा है। ब्रिक्स के विस्तार और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच, भारत यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि यह समूह न केवल आर्थिक सहयोग के लिए, बल्कि वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के एक सशक्त मंच के रूप में भी कार्य करे।
इस बैठक का मुख्य संदेश यह है कि भारत ब्रिक्स की अपनी अध्यक्षता को केवल व्यापारिक आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रखना चाहता। इसके बजाय, भारत का प्रयास है कि बहुपक्षीय व्यवस्था को पुनर्जीवित किया जाए और वैश्विक मंचों पर उन देशों की चिंताओं को रखा जाए जो अभी तक हाशिए पर हैं। गुटेरेस के साथ हुई यह चर्चा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लोकतांत्रिक स्वरूप को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।


