

"बिहार के मोतिहारी में नक्सली मामले के वांटेड वारंटी को हिरासत में लेने के कुछ घंटे बाद ही छोड़ देने के मामले में पलामू पुलिस ने सख्त एक्शन लिया है। दंगवार ओपी प्रभारी सब-इंस्पेक्टर वीरेंद्र मेहता को लाइन हाजिर कर दिया गया है।"
बिहार के मोतिहारी जिले में नक्सली मामले में वांटेड एक वारंटी को गिरफ्तार करने के बाद कथित तौर पर छोड़ने के गंभीर मामले में पलामू पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। पलामू जिले के दंगवार ओपी प्रभारी सब-इंस्पेक्टर वीरेंद्र मेहता को इस लापवाही और अनुशासनहीनता के चलते लाइन हाजिर कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग में हड़कंप मचाने वाली है, क्योंकि एक वांछित अपराधी को थाने से ही छोड़ दिए जाने की बात सामने आई थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पलामू पुलिस इन दिनों वारंटियों और अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चला रही है। इसी अभियान के तहत 22 सितंबर की रात दंगवार ओपी क्षेत्र की पुलिस ने बिहार के मोतिहारी जिले के एक नक्सली मामले में वांटेड राजेंद्र पासवान को हिरासत में लिया था। बताया जा रहा है कि आरोपी को रात करीब 12 बजे पकड़ा गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि तड़के करीब 3 से 3:30 बजे के बीच उसे बिना किसी उच्च अधिकारी की अनुमति के छोड़ दिया गया।

मामला संज्ञान में आते ही पलामू एसपी कपिल चौधरी ने इसे बेहद गंभीरता से लिया और तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच के आदेश दिए। हुसैनाबाद एसडीपीओ दिव्यांशु शुक्ला के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच में वारंटी को हिरासत में लेने और उसके बाद मिलीभगत कर छोड़ दिए जाने की पुष्टि हुई। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर दंगवार ओपी प्रभारी वीरेंद्र मेहता के खिलाफ यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
करीब 65 वर्षीय राजेंद्र पासवान के खिलाफ बिहार के मोतिहारी जिले में नक्सली गतिविधियों से जुड़ा मामला दर्ज है और वह लंबे समय से फरार चल रहा था। चूंकि दंगवार ओपी बिहार सीमा के बेहद करीब स्थित है, इसलिए इस क्षेत्र में सुरक्षा और सतर्कता को लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं। पलामू एसपी कपिल चौधरी ने स्पष्ट किया है कि विभागीय नियमों के विरुद्ध कार्य करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी ऐसी सख्ती जारी रहेगी।





