

"ओडिशा सरकार अब भगवान श्री जगन्नाथ की देश-विदेश में फैली संपत्तियों का सत्यापन करेगी, जिसमें पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में मौजूद कथित जमीन भी शामिल है।"
ओडिशा सरकार ने भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर की संपत्तियों को सुरक्षित करने और अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है। कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने जानकारी दी कि अब तक राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों में करीब 36 हजार एकड़ जमीन की पहचान की जा चुकी है। अब सरकार न केवल ओडिशा बल्कि विदेशों में भी मौजूद मंदिर की संपत्तियों का रिकॉर्ड खंगालने की तैयारी में है।
इस अभियान के तहत सबसे चौंकाने वाला खुलासा पाकिस्तान के सिंध प्रांत से जुड़ा है। मंत्री के अनुसार, ऐसी सूचनाएं हैं कि सिंध में भी भगवान जगन्नाथ के नाम पर जमीन मौजूद हो सकती है। सरकार अब उन पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स का सत्यापन कराएगी, ताकि इस दावे की सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल, यह विषय जांच और पहचान के प्रारंभिक चरण में है।
सरकार की इस बड़ी कवायद का उद्देश्य मंदिर की अचल संपत्तियों का एक व्यवस्थित और डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है। आंकड़ों के मुताबिक, पहचानी गई जमीन का लगभग 25 से 30 फीसदी हिस्सा लंबे समय से अवैध कब्जों में है। प्रशासन अब इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को तेज कर रहा है, साथ ही उन लोगों को राहत देने पर भी विचार किया जा रहा है जिनका जमीन पर वैध दावा है।
ओडिशा सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नए नियमों को मंजूरी दे दी है। मंदिर प्रशासन का मुख्य लक्ष्य संपत्तियों के स्वामित्व की पुष्टि करना और उनसे प्राप्त होने वाली आय को सुरक्षित कर उसे मंदिर के विकास कार्यों में लगाना है। सरकार का यह कदम श्री जगन्नाथ मंदिर की ऐतिहासिक विरासत और उसकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है।





