

"सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज FIR को बंद करने का आदेश दिया है, जिससे हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है।"
NEET-UG विवाद को लेकर जुलाई 2026 में हुए छात्र प्रदर्शनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए देशभर में दर्ज FIR को बंद करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुई घटनाओं से जुड़ी किसी भी पुरानी FIR पर आगे कार्रवाई नहीं होगी और न ही भविष्य में इस मुद्दे पर कोई नई FIR दर्ज की जाएगी।
संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए कोर्ट ने यह कदम युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उठाया है। हालांकि, न्यायालय ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की FIR को जारी रखने की अनुमति दी है। यह अपवाद उन लोगों के लिए है जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने भी एक महत्वपूर्ण आश्वासन दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को सूचित किया कि परीक्षा विवाद के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार ने इस प्रक्रिया के तौर-तरीके निर्धारित करने के लिए राज्यों के साथ परामर्श हेतु तीन महीने का समय मांगा है।
अदालत के इस उदार रुख और सरकार के आश्वासन के बाद छात्र संगठनों ने अपना विरोध वापस लेने का निर्णय लिया है। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने घोषणा की कि 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित 'छात्र मार्च' को रद्द कर दिया गया है। इस फैसले को शिक्षा जगत में एक बड़ी सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
