

"मुंबई में खुद को आयकर और क्राइम ब्रांच अधिकारी बताकर एक कारोबारी से 9 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।"
मुंबई में फिल्मी अंदाज में अंजाम दी गई एक बड़ी ठगी और अपहरण की वारदात का खुलासा हुआ है। एक गिरोह ने खुद को आयकर विभाग और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर एक व्यवसायी के कार्यालय पर धावा बोला। आरोपियों ने फर्जी पहचान-पत्र दिखाकर कारोबारी और उनकी पत्नी को बंधक बना लिया और कार्यालय में मौजूद 10 कर्मचारियों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए।
शिकायतकर्ता राजकुमार कंडासामी के अनुसार, आरोपियों ने उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पूरे मामले को रफा-दफा करने के लिए 9 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की थी। पीड़ित द्वारा 2 सितंबर 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद, कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने तुरंत सक्रियता दिखाई और तकनीकी जांच के आधार पर जाल बिछाया।
पुलिस की कार्रवाई में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें संतोष उदय खोपडेकर, विनय रमेश मोरे, प्रेम किसन सबनानी, प्रज्ञा हरीश माईन, रेशमा शमराज वारंग और सचिन हाफिज शेख शामिल हैं। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और उनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।
यह मामला केवल फिरौती तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी तंत्र के दुरुपयोग और सुरक्षा में सेंधमारी का एक गंभीर मुद्दा बन गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह गिरोह पहले भी इसी तरह की फर्जी छापेमारी को अंजाम दे चुका है। फिलहाल, गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश जारी है और पुलिस पूरे ऑपरेशन के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।


