

"झारखंड में MMDR संशोधन अधिनियम को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने जेएमएम के आरोपों को खारिज करते हुए राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाने का ऐलान किया है।"
MMDR संशोधन अधिनियम को लेकर झारखंड की राजनीति में उबाल आ गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और JMM द्वारा राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा के बाद, भाजपा ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने विपक्ष पर खनिज अधिनियम को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
भाजपा का जागरूकता अभियान: आदित्य साहू ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस अधिनियम के लाभों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान चलाएगी। उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाना और निवेश को बढ़ावा देना है, न कि राज्यों के अधिकार छीनना।
आदिवासी और दलित हितों पर सफाई: साहू ने मुख्यमंत्री के दावों को भ्रामक बताया और जोर दिया कि खनिज संपदा का राजस्व आदिवासी, दलित, पिछड़े और विस्थापित परिवारों के विकास के लिए ही है। उन्होंने कहा कि 2014 से 2024 के बीच राज्यों का खनिज राजस्व 354 प्रतिशत बढ़ा है।
झारखंड सरकार को चुनौती: भाजपा अध्यक्ष ने राज्य सरकार की खनन नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले छह वर्षों में राज्य में केवल चार खदानों की नीलामी हुई है, जो राज्य के खराब प्रबंधन को दर्शाता है। उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सरकार ने सफलतापूर्वक खदानों का संचालन कर भारी राजस्व अर्जित किया है।
विकास बनाम राजनीति: आदित्य साहू ने JMM पर आरोप लगाया कि पार्टी अपनी गिरती राजनीतिक जमीन बचाने के लिए आंदोलन और आर्थिक नाकेबंदी की धमकी दे रही है। उन्होंने राज्य सरकार को अवैध खनन रोकने और पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।





