

"संसद से MMDR संशोधन विधेयक 2026 पास होने के बाद झारखंड सरकार ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सीएम हेमंत सोरेन ने इसे राज्य के अधिकारों पर हमला बताते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।"
संसद के दोनों सदनों से MMDR संशोधन विधेयक 2026 के पारित होने के बाद झारखंड की राजनीति में उबाल आ गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार के इस फैसले को राज्य के संघीय ढांचे और आर्थिक हितों पर सीधा प्रहार बताया है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने दावा किया है कि इस बिल के लागू होने से राज्य को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के खनिज राजस्व का नुकसान हो सकता है। उन्होंने चिंता जताई है कि राजस्व में इस भारी कटौती का सीधा असर राज्य की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना पर पड़ सकता है, जिससे यह योजना अधर में लटक सकती है। इरफान अंसारी ने स्पष्ट किया है कि झारखंड में इस बिल को किसी भी स्थिति में लागू नहीं होने दिया जाएगा।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि राज्य इस मुद्दे पर ऐसा आंदोलन करेगा जिसे पूरा देश देखेगा। हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने के बाद अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी पत्र लिखकर बिल के प्रावधानों पर अपनी संवैधानिक और वित्तीय चिंताएं जाहिर की हैं।
यह विवाद मुख्य रूप से राज्यों के खनिज अधिकारों और उन पर टैक्स या सेस लगाने की शक्तियों को लेकर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बिल लागू होता है, तो झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।




