

"कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने मैथ्यू वैन डाइक मामले में UAPA की धाराएं न लगाने पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।"
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और छह अन्य विदेशी नागरिकों के खिलाफ एनआईए (NIA) द्वारा दाखिल चार्जशीट के बाद सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि यदि रिपोर्टों के अनुसार इन विदेशी नागरिकों के खिलाफ आतंक से जुड़े आरोप हटाए गए हैं, तो सरकार को इसके पीछे की स्पष्ट वजह देश के सामने रखनी चाहिए।
एनआईए ने अपनी चार्जशीट में यूएपीए (UAPA) की धाराओं को शामिल नहीं किया है और केवल इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये आरोपी बिना अनुमति के प्रतिबंधित क्षेत्रों में दाखिल हुए और म्यांमार के विद्रोही समूहों को ड्रोन तकनीक के प्रशिक्षण की योजना बना रहे थे। हालांकि, एनआईए ने स्पष्ट किया है कि यूएपीए से जुड़ी जांच अभी बंद नहीं हुई है और तकनीकी उपकरणों की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
अभिषेक मनु सिंघवी ने इस पूरे मामले को भारत-अमेरिका के बीच हालिया उच्चस्तरीय बैठकों और कूटनीतिक संपर्कों से जोड़ते हुए संदेह जाहिर किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या दोनों देशों के बीच हुई बैठकों के बाद मामले की दिशा बदली गई है। सिंघवी ने सरकार से यह भी पूछा कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद चार्जशीट में यूएपीए जैसी सख्त धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं।
वर्तमान में, सभी सात आरोपियों के खिलाफ इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन का मामला अदालत में चल रहा है, जिसकी अगली सुनवाई 1 अक्टूबर के लिए निर्धारित की गई है। सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। हालांकि, जांच एजेंसी ने साफ किया है कि डिजिटल साक्ष्यों की जांच पूरी होने पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने का विकल्प खुला है।





