

"झारखंड में आदिवासी राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा की हत्या पर सियासत गर्मा गई है। बीजेपी ने सरकार और पुलिस प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।"
झारखंड में आदिवासी राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा की संकोचजनक हत्या को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस गंभीर मामले में राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को सात दिनों का सख्त अल्टीमेटम दिया है। बीजेपी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद समीर उरांव ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सभी हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं की जाती है, तो पार्टी व्यापक स्तर पर चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता चुनेगी।
बीजेपी प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता के दौरान समीर उरांव ने सीधे तौर पर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर भारी लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने इस हत्याकांड के पीछे किसी गहरी और सुनियोजित साजिश की आशंका भी जताई। उन्होंने बताया कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर गठित छह सदस्यीय जांच कमेटी ने घटनास्थल का दौरा कर मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों से विस्तृत बातचीत की है, जिससे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

जांच कमेटी के हवाले से समीर उरांव ने बताया कि लक्ष्मीकांत मुंडा बेहद सरल और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, जिनका किसी से भी कोई प्रत्यक्ष विवाद नहीं था। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि हत्या वाले दिन उनके कार्यालय से उन्हें लगातार बार-बार फोन क्यों आ रहे थे। बीजेपी नेता ने आशंका जताई है कि उन पर किसी गैरकानूनी काम को करने का दबाव बनाया जा रहा होगा और इस हत्या में किसी नजदीकी परिचित का भी हाथ हो सकता है, जिसकी पुलिस को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए समीर उरांव ने कहा कि आज झारखंड में आदिवासी, मूलवासी, महिलाएं और व्यापारी वर्ग पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी अपराधियों की गिरफ्तारी न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रेसवार्ता के अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की जांच रिपोर्ट जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष को सौंपी जाएगी और डीजीपी से मिलकर त्वरित कार्रवाई की मांग की जाएगी। इस अवसर पर अशोक बड़ाईक, पिंकी खोया, रवि मुंडा समेत कई अन्य नेता भी मौजूद रहे।






