

"झारखंड के खूंटी जिले में मुरहू से मारुंगटोली जाने वाली सड़क पिछले 20 वर्षों से जर्जर हालत में है। कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।"
झारखंड के खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड में सड़क की बदहाली ने स्थानीय ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन बना दिया है। मुरहू से मारुंगटोली तक जाने वाली लगभग दो किलोमीटर लंबी यह सड़क पूरी तरह से जर्जर और ऊबड़-खाबड़ हो चुकी है। बारिश के मौसम में इस मार्ग पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति बन जाती है, जिससे लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। स्थिति इतनी दयनीय है कि साधन होने के बावजूद ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए पैदल सफर करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
इस बदहाल सड़क का सबसे बड़ा खामियाजा मरीजों और गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। हाल ही में मारुंगटोली निवासी विश्राम कुमार को अपने नवजात शिशु को गोद में लेकर अस्पताल से करीब चार किलोमीटर पैदल घर लौटने की विवशता उठानी पड़ी, क्योंकि खराब रास्ते के कारण वाहन वहां तक जाने से कतराते हैं। इसके अलावा, सड़क पर मौजूद गहरे गड्ढों और फिसलन के कारण कई ग्रामीण गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

सड़क की इस नारकीय स्थिति से केवल मरीज ही नहीं, बल्कि स्कूली बच्चे और आंगनबाड़ी जाने वाले नौनिहाल भी बुरी तरह प्रभावित हैं। छात्रा अनन्या कुमारी और स्थानीय निवासी फूलमनी ओड़ेया ने बताया कि रोजाना स्कूल और बाजार आने-जाने के दौरान बच्चों के कीचड़ में गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है। ग्रामीणों के पास साइकिल होने के बावजूद वे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पैदल चलने को विवश हैं, जिससे उनकी शिक्षा और दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस मार्ग के निर्माण के लिए पिछले 20 वर्षों से मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। मुरहू के उपप्रमुख अरुण साबू के अनुसार, यह सड़क नेशनल हाईवे को मारुंगटोली से जोड़ती है और पांच से छह पंचायतों के हजारों लोग इसका उपयोग करते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से जल्द से जल्द इस मुख्य मार्ग के निर्माण की मांग की है ताकि उन्हें इस लंबी पीड़ा से राहत मिल सके।





