

"झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC-CGL) परीक्षा विवाद पर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। सरकार ने कहा है कि जांच में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां पाई गईं, जिसके कारण पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित हो गई है।"
झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) परीक्षा को लेकर मचे घमासान के बीच राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। सरकार ने अदालत में शपथपत्र देकर परीक्षा रद्द करने के अपने फैसले का पुरजोर बचाव किया है। सरकार का तर्क है कि जांच के दौरान ऐसे गंभीर तथ्य सामने आए हैं जो पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करते हैं।
सरकार द्वारा दाखिल शपथपत्र के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि परीक्षा से पहले लगभग 28 अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाया गया था, जहां उन्हें सवाल-जवाब रटाए गए थे। इनमें से 10 अभ्यर्थी परीक्षा में सफल भी रहे। इसके अलावा, जांच एजेंसियों को नेपाल के अलावा आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो जैसे कई शहरों में अभ्यर्थियों को पेपर उपलब्ध कराने और पैसों के लेन-देन के पुख्ता संकेत मिले हैं।

सरकार ने अदालत को बताया कि जब चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पूरी तरह से खंडित हो जाए और यह भेद करना असंभव हो जाए कि किन उम्मीदवारों ने मेहनत से परीक्षा पास की है और किन्हें धांधली का लाभ मिला है, तब पूरी परीक्षा रद्द करना ही एकमात्र कानूनी विकल्प बचता है। इस कदम के समर्थन में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों और दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया है।
गौरतलब है कि इस मामले में पहले भी कई कानूनी पेंच फंसे रहे हैं और अदालत ने पूर्व में सरकार के फैसले पर रोक लगाते हुए जांच के दायरे को स्पष्ट किया था। सरकार के इस नए हलफनामे के बाद जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति और गहरी हो गई है, और अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के आगामी आदेश पर टिकी हैं।





