

"झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में नया खुलासा हुआ है। मुख्य आरोपी संजीत कुमार के कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पता चला है कि वह 119 सफल अभ्यर्थियों के सीधे संपर्क में था।"
झारखंड में जेपीएससी (JPSC) भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और धांधली के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ताजा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) ने इस कथित घोटाले के बड़े नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। जांच में सामने आया है कि पतंजलि आईएएस एकेडमी के संचालक संजीत कुमार के दो मोबाइल नंबरों से परीक्षा में सफल हुए 119 अभ्यर्थियों के साथ सीधा संपर्क था। इसी गंभीर मामले को आधार बनाते हुए अदालत ने आरोपी संजीत की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।
सीआईडी ने अदालत को जानकारी दी कि परीक्षा में सफल हुए कुल 743 अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की गहन जांच की गई। इस दौरान संजीत के मोबाइल नंबरों और इन सफल उम्मीदवारों के बीच लगातार बातचीत के प्रमाण मिले हैं। जांच एजेंसी ने इस कॉल डिटेल रिकॉर्ड को इस मामले में सबसे अहम साक्ष्य करार दिया है। एजेंसी का मानना है कि यह डेटा परीक्षा में हुई बड़े पैमाने पर धांधली और एक संगठित सिंडिकेट के काम करने के तरीके को बेनकाब करता है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है।


इस पूरे प्रकरण में भाई-भतीजावाद और पैसों के लेन-देन के भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।चयनित अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के एवज में 20 लाख रुपये तक की डील तय हुई थी। सीआईडी की जांच में कुछ अभ्यर्थियों के बीच पैसों के आदान-प्रदान और उनके बयानों का भी हवाला दिया गया है। इसके अलावा, संजीत द्वारा जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन के पीए के लिए खरीदी गई कार की डाउन पेमेंट और कई संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन भी जांच के दायरे में हैं।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए टिप्पणी की है कि इस तरह की कथित धांधली केवल परीक्षा प्रणाली को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि दिन-रात मेहनत करने वाले ईमानदार युवाओं के भविष्य और व्यवस्था से उनका भरोसा भी तोड़ती है। हालांकि इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में चल रही न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर ही होगी, लेकिन इस खुलासे ने राज्य की प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला दिया है।





