

"झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के मामले में सीआईडी ने जांच तेज कर दी है। आईजीएन संचालक मिथिलेश सिंह समेत पांच प्रमुख आरोपियों के खिलाफ कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।"
झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राज्य की सीआईडी (CID) ने इस मामले में जांच तेज करते हुए पांच प्रमुख आरोपियों के खिलाफ कुर्की-जब्ती की सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। जिन आरोपियों पर शिकंजा कसा जा रहा है, उनमें आईसीएन (ICN) के संचालक मिथिलेश सिंह के अलावा आदित्य पांडेय, पवन कुमार सिंह, प्रकाश और लालू कुमार यादव के नाम शामिल हैं। इन पर परीक्षाओं में नंबर बढ़वाने और अभ्यर्थियों की सेटिंग कराने जैसे गंभीर आरोप हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, रांची के रहने वाले आदित्य पांडेय पर परीक्षा में अभ्यर्थियों की सेटिंग कराने का मुख्य आरोप है। वह विभिन्न कोचिंग नेटवर्क के माध्यम से सीधे अभ्यर्थियों के संपर्क में रहता था और परीक्षा में पास कराने या बेहतर अंक दिलाने का झांसा देकर उनसे भारी रकम वसूलता था। सीआईडी अब इस पूरे सिंडिकेट और वित्तीय लेन-देन के स्रोतों का पता लगाने में जुटी है, ताकि इस अवैध धंधे में शामिल अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।

वहीं, इस पूरे घोटाले में अन्य आरोपियों की भूमिका भी बेहद संदिग्ध पाई गई है। पवन कुमार सिंह पर कथित परीक्षा सिंडिकेट के लिए कैश हैंडलर के रूप में काम करने और अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने का आरोप है। इसके अलावा, हजारीबाग के लालू कुमार यादव पर परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड, रोल नंबर और अन्य गोपनीय दस्तावेज जुटाने की जिम्मेदारी थी। जांच एजेंसी यह पुख्ता करने में जुटी है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किस प्रकार किया गया था।
यह अवैध नेटवर्क केवल रांची तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी जड़ें बोकारो, धनबाद और हजारीबाग सहित कई अन्य जिलों तक फैली हुई थीं। सीआईडी इन सभी जिलों में आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दे रही है और डिजिटल सबूत जुटा रही है। आरोपियों के फरार होने की स्थिति में अदालत के आदेश पर कुर्की-जब्ती की कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी आरोप फिलहाल जांच के अधीन हैं और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





