

"झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।"
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रिलिम्स परीक्षा 2025 में कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने परीक्षा में धांधली के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि छात्र लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। याचिका में मामले की जांच CBI या किसी पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इन आरोपों की उचित जांच अत्यंत आवश्यक है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि मामले में फॉरेंसिक एग्जामिनेशन जैसे वैज्ञानिक पहलुओं की भी जरूरत पड़ सकती है। सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार ने नोटिस स्वीकार कर लिया है और अब कोर्ट ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
यह मामला झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है, और सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद जगी है। अगली सुनवाई में राज्य सरकार का जवाब इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगा।





