

"झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए रांची में राजभवन के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग की।"
झारखंड की राजधानी रांची में बुधवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बड़ा विरोध-प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने रांची स्थित राजभवन के समक्ष जोरदार नारेबाजी करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पद के कथित दुरुपयोग और एकतरफा फैसले लेने का गंभीर आरोप लगाया। झामुमो ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से बर्खास्त किया जाए।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान झामुमो नेताओं ने एक मीडिया जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, SIR प्रक्रिया, फॉर्म-6 और मतदाता डेटाबेस से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर थीं, जिन्हें कथित तौर पर दरकिनार कर दिया गया था।



झामुमो का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा उठाई गई आंतरिक आपत्तियों की अनदेखी कर एकतरफा फैसले लिए गए, जिसके कारण बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। पार्टी ने इसे देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा बताया है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन सभी आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि SIR सहित सभी फैसले आपसी विचार-विमर्श और तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से ही लिए गए थे।
रांची जिला, रांची महानगर, खूंटी, लोहरदगा और रामगढ़ जिला समितियों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में झामुमो के कई दिग्गज नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य, सांसद महुआ माजी और विधायक विकास मुंडा सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे राज्य स्तर पर अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगे।





