

"झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 5,000 वर्गमीटर से अधिक बिल्ट-अप एरिया वाले निर्माण प्रोजेक्ट्स के लिए पर्यावरणीय मंजूरी अनिवार्य कर दी है। डेवलपर्स को 31 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा।"
झारखंड में बड़े भवन निर्माण और रियल एस्टेट परियोजनाओं को लेकर पर्यावरणीय नियमों का दायरा अब और अधिक सख्त कर दिया गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि 5,000 वर्गमीटर या उससे अधिक बिल्ट-अप एरिया वाली सभी निर्माण परियोजनाओं, हाउसिंग सोसाइटियों और रियल एस्टेट डेवलपर्स को पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। इसके तहत परियोजना प्रमोटरों को बोर्ड के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्थापना सहमति और संचालन सहमति की प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर पूरी करनी होगी। बोर्ड ने यह भी चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों के खिलाफ कड़े पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


निर्माण परियोजनाओं के अलावा, राज्य में थोक कचरा उत्पादकों (बल्क वेस्ट जनरेटर) की जवाबदेही भी तय कर दी गई है। बड़े भवनों, आवासीय परिसरों और विभिन्न संस्थानों से निकलने वाले ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए संबंधित संस्थानों को स्थानीय निकाय के पोर्टल पर अपना निबंधन कराना अनिवार्य होगा। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव राजीव लोचन बख्शी की ओर से जारी इस आदेश के तहत सभी संबंधित पक्षों को 31 दिसंबर 2026 तक आवेदन और रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इस बड़े फैसले से राज्य में निर्माण गतिविधियों के दौरान पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन व्यवस्था में सुधार आने की पूरी उम्मीद है।






