

"झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भाजपा ने हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है।"
झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने रांची में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और तुष्टिकरण के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार के कार्यकाल में अधिकारी सरकारी सेवक के बजाय सत्ताधारी गठबंधन के 'पोलिंग एजेंट' के रूप में काम कर रहे हैं।
भाजपा ने संथाल परगना के संवेदनशील इलाकों जैसे साहिबगंज, पाकुड़ और राजमहल में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर विसंगतियां होने का दावा किया है। आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों में मतदाताओं की उम्र और संख्या में हेरफेर की जा रही है। पार्टी ने इन इलाकों में मतदाता सूची के शत-प्रतिशत सत्यापन की मांग की है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें।
प्रेसवार्ता में पाकुड़ के बरहरवा का जिक्र करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने फर्जी आवासीय प्रमाण पत्रों के माध्यम से नाम जोड़ने के प्रयास का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इस मामले में पहले ही चार अपात्र लोगों और एक कॉमन सर्विस सेंटर संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने राजमहल विधानसभा के कई बूथों पर एक ही पते पर असामान्य रूप से मतदाताओं की संख्या बढ़ने को चुनावी धांधली की कोशिश बताया है।
भाजपा ने इन कथित अनियमितताओं के पीछे बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि सरकार संदिग्ध तत्वों को संरक्षण दे रही है। पार्टी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई, तो भाजपा इसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होगी। प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद ने भी इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग दोहराई है।

