

"झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC-CGL समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक जारी रखी है। मामले की जांच की निगरानी के लिए हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश को नियुक्त किया गया है।"
झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC-CGL समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक बरकरार रखी है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर सभी नियुक्तियों को गलत नहीं माना जा सकता है। अदालत के इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है जो निष्पक्ष रूप से चयनित हुए थे।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच की निगरानी के लिए झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरके मलिक को इस पूरी प्रक्रिया के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि जांच के दौरान किसी भी नियुक्त अभ्यर्थी को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है, तो वह सीधे रिटायर्ड जस्टिस के समक्ष अपनी बात रख सकता है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि हालांकि यह प्रतीत होता है कि सभी नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी तरीके से नहीं हुईं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हर नियुक्ति में गड़बड़ी हुई है। कोर्ट ने चिंता जताई कि भर्ती प्रक्रिया में वर्षों का समय लगता है, ऐसे में सभी नियुक्तियों को एक साथ रद्द करने से उन कर्मचारियों और अधिकारियों पर बुरा असर पड़ेगा जिन पर व्यक्तिगत रूप से कोई आरोप नहीं है।
फिलहाल कोर्ट ने सरकार के नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर रोक जारी रखी है और मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित की है। सरकार का पक्ष है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित हो चुकी है और सही-गलत को अलग करना कठिन है, जबकि कोर्ट का रुख है कि सामूहिक रूप से सभी को सजा नहीं दी जा सकती। यही विरोधाभास इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बनाता है।





