

"झारखंड सरकार ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को मजबूत करने पर जोर दिया है और केंद्र से वित्तीय सहयोग की मांग की है।"
वर्ष 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य को लेकर झारखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। राज्य सरकार का कहना है कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल मजबूत अर्थव्यवस्था से नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को कम करके ही हासिल किया जा सकता है। इसके लिए देश के आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
सरकार की ओर से जारी दस्तावेज में कहा गया है कि देश की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सही आकलन किए बिना विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। इसमें प्रति व्यक्ति आय, सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण, वित्त पोषण, घरेलू संस्थागत निर्माण, जलवायु जोखिम और राजकोषीय प्रबंधन जैसे प्रमुख मानकों का विशेष उल्लेख किया गया है।

दस्तावेज में झारखंड के खनिज संसाधनों और वित्तीय स्थिति का भी जिक्र किया गया है। सरकार के अनुसार, MMDR कानून में हालिया संशोधन से राज्य को लगभग 14,000 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो सकता है, जिसे लेकर राज्य सरकार ने संशोधित कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। इसके अलावा, VB-G RAM-G योजना में फंड शेयरिंग के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
झारखंड सरकार ने खनिज संसाधनों से जुड़े राजस्व अधिकार, जीएसटी क्षतिपूर्ति और केंद्र-राज्य हिस्सेदारी जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार से खुलकर सहयोग की मांग की है। राज्य का मानना है कि खनिज संपदा वाले राज्यों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन मिलने से ही 2047 तक देश के संतुलित विकास के लक्ष्य में प्रभावी योगदान दिया जा सकता है।





