

"गढ़वा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिवंगत माता रूपी सोरेन पर कथित अमर्यादित टिप्पणी के खिलाफ आदिवासी समाज सड़कों पर उतर आया है। हजारों प्रदर्शनकारियों ने टाउन हॉल से मार्च निकालकर भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के आवास का घेराव किया और सार्वजनिक माफी की मांग की।"
झारखंड के गढ़वा जिले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिवंगत माता रूपी सोरेन को लेकर भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी की कथित अमर्यादित टिप्पणी के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। आदिवासी एकता मंच के बैनर तले हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग सड़कों पर उतरे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने टाउन हॉल से एक विरोध मार्च निकाला, जिसमें सरकार विरोधी और विधायक के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा रंका मोड़ पर देखने को मिला, जहां आक्रोशित भीड़ ने विधायक का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी की दिवंगत माता और वह भी एक बुजुर्ग महिला के खिलाफ इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने इसे आदिवासी समाज की भावनाओं और मानवीय संवेदनाओं पर सीधा आघात करार दिया।

आदिवासी एकता मंच के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी को इस बयान के लिए तत्काल सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने झारखंड विधानसभा अध्यक्ष से इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेने और नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने की अपील की है। मंच के सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही माफी नहीं मांगी गई, तो इस आंदोलन को गढ़वा से लेकर रांची तक और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
मंच के नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि जनप्रतिनिधियों की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे समाज में सौहार्द बनाए रखें और सार्वजनिक जीवन में अपनी भाषा तथा आचरण पर संयम बरतें। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज के मान-सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।





