

"मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त जांच के दौरान पुलिस विभाग में ड्राइवर के पद पर कार्यरत हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान के पास करोड़ों की अवैध संपत्ति का मामला सामने आया है। जांच में उनके और सहयोगियों के नाम पर 38 अचल संपत्तियों का खुलासा हुआ है।"
मध्य प्रदेश के आर्थिक राजधानी इंदौर में लोकायुक्त पुलिस द्वारा एक हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) के खिलाफ की जा रही कार्रवाई में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पीटीसी में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों के नाम पर कुल 38 अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई है, जिनका बाजार मूल्य करीब 35.46 करोड़ रुपये आंका गया है। इस बड़े खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन संपत्तियों का सरकारी गाइडलाइन मूल्य 12.97 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि इनका वास्तविक बाजार मूल्य लगभग 35.46 करोड़ रुपये बैठता है। इसके अलावा, प्रारंभिक दस्तावेजों से पता चला है कि इन चल और अचल संपत्तियों की खरीद पर कुल 15.52 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसकी गहनता से वित्तीय जांच की जा रही है।

लोकायुक्त टीम की तफ्तीश केवल इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि देवास जिले में कृषि भूमि और प्लॉट खरीदे जाने के विवरण भी इसमें शामिल हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, रोशनी वर्मा के नाम पर 1.15 हेक्टेयर जमीन, साहिल ट्रेडिंग के नाम पर प्लॉट, तथा नफीस खान और रानु कुशवाह के नाम पर भी संपत्तियों का उल्लेख मिला है, जिनकी मालिकाना हक की जांच हो रही है।
फिलहाल लोकायुक्त की टीम संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद में इस्तेमाल किए गए धन के स्रोतों और आरोपी की ज्ञात आय के बीच तालमेल की जांच कर रही है। हालांकि, अभी तक इन संपत्तियों को आधिकारिक तौर पर बेनामी घोषित करने या आय से अधिक संपत्ति के मामले में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है, और जांच एजेंसी की कार्रवाई अभी जारी है।





