

"झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन की अस्थियों का रामगढ़ के रजरप्पा में दामोदर-भैरवी नदी के संगम पर संताली परंपरा के अनुसार विसर्जन किया।"
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन की अस्थियों का रजरप्पा में पूरे विधि-विधान के साथ विसर्जन किया। दामोदर और भैरवी नदी के पवित्र संगम पर मां को अंतिम विदाई देते समय मुख्यमंत्री काफी भावुक नजर आए। उन्होंने पारंपरिक संताली रीति-रिवाजों का पूरी निष्ठा के साथ पालन करते हुए यह अनुष्ठान संपन्न किया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक गांव नेमरा से मां रूपी सोरेन का अस्थि कलश लेकर रजरप्पा पहुंचे थे। यहां प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर के समीप दामोदर-भैरवी संगम स्थित जाड्ंग बाहा तुपुनाई घाट पर अस्थियों का विसर्जन किया गया। इस दौरान उनके परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे जिन्होंने मां को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

यह पूरा पारंपरिक अनुष्ठान परगना बाबा जोगेश्वर सोरेन के नेतृत्व में संपन्न कराया गया। इस दौरान मांझी बाबा बिन्दे सोरेन, लुगू गोडैत, सुरेन्द्र टुडू, पारानीक बाबा महावीर मुर्मू, सोमाय टुडू और जीतलाल मुर्मू समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे जिन्होंने पारंपरिक विधि-विधान को पूरा करवाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सभी धार्मिक और पारंपरिक अनुष्ठान पूरे होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्थानीय ग्रामीणों के बीच वस्त्र वितरित किए। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री की मां रूपी सोरेन के निधन के बाद 18 अक्टूबर को उनके पैतृक गांव नेमरा में संस्कार भोज का आयोजन किया गया था, और अब रजरप्पा में अस्थि विसर्जन के साथ अंतिम संस्कार से जुड़े सभी संस्कारों को पूरा कर लिया गया है।





