

"ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही बस में नाबालिग के साथ सामूहिक यौन उत्पीड़न पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, संबंधित पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया।"
ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जाने वाली एक स्लीपर बस में नाबालिग लड़की के साथ हुए कथित सामूहिक यौन उत्पीड़न के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त, गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त और मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इस गंभीर मामले में दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 16 वर्षीय पीड़िता 4 अगस्त 2026 को मैनपुरी से ग्रेटर नोएडा के रास्ते में थी, तभी वह रास्ता भटककर परी चौक पहुंच गई। आरोप है कि सहायता के नाम पर उसे एक स्लीपर बस में बैठाया गया, जहां बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने रास्ते में उसके साथ यौन हिंसा की। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास छोड़ कर फरार हो गए थे।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए NHRC ने कहा है कि यदि मीडिया में आई खबरें सच हैं, तो यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। दिल्ली पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर POCSO अधिनियम और BNS की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और बस को जब्त कर उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है ताकि ठोस सबूत जुटाए जा सकें।
आयोग ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि उसे जांच की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ पीड़िता को अब तक दिए गए मुआवजे और सुरक्षा उपायों की जानकारी चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी हो। यह घटना सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े करती है, जिस पर पुलिस प्रशासन को अपनी रिपोर्ट में जवाब देना होगा।
