
"गिरिडीह के नगर थाना परिसर में एक युवक के साथ कथित मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है। घायल युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि पुलिस ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।"
झारखंड के गिरिडीह जिले में नगर थाना परिसर का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक की पिटाई की जा रही है। पीड़ित युवक लखन साव का आरोप है कि पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर न केवल बेरहमी से पीटा, बल्कि उसके साथ दुर्व्यवहार भी किया। इस घटना के बाद युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पीड़ित लखन साव ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह अपनी जब्त बाइक वापस लेने के लिए नगर थाना गया था। उसने आरोप लगाया कि वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी, जिसके चलते वह बेहोश होकर गिर पड़ा। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए लखन की बहन ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि अगर युवक हंगामा कर रहा था, तो उसे शारीरिक प्रताड़ना देने का हक पुलिस को किसने दिया?

दूसरी ओर, नगर थाना प्रभारी रतन कुमार सिंह ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस का दावा है कि युवक और उसके साथी नशे की हालत में थे और उन्होंने थाना परिसर में जमकर हंगामा किया। प्रभारी के अनुसार, युवक 'डेंड्राइट' के नशे में धुत था और उसकी बिगड़ती तबीयत का कारण नशे का अत्यधिक प्रभाव था, न कि पुलिस की कोई पिटाई। पुलिस का कहना है कि मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
फिलहाल, यह मामला पुलिस के दावों और पीड़ित के आरोपों के बीच उलझ गया है। अब पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने के लिए सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट का सहारा लिया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी सतर्क है और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। पुलिस की कार्यशैली पर उठते सवालों के बीच अब जनता की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।





