

"झारखंड के गिरिडीह जिले के गावां प्रखंड स्थित तीनतरवा गांव में आज भी पक्की सड़क नहीं है। स्थिति इतनी दयनीय है कि गर्भवती महिलाओं और बीमार मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।"
झारखंड के गिरिडीह जिले के गावां प्रखंड के अंतर्गत आने वाला तीनतरवा गांव आजादी के 79 साल बीत जाने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। करीब 500 की आबादी वाले इस गांव के लोगों को आज तक पक्की सड़क नसीब नहीं हुई है, जिसके कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो जाती है, जब पूरा रास्ता कीचड़ और जलजमाव से तब्दील हो जाता है।
गांव की बदहाली का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान मरीजों को अस्पताल पहुंचाना किसी जंग जीतने जैसा होता है। खराब और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के कारण एंबुलेंस या अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों के पास बीमार व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को खाट पर लिटाकर मुख्य सड़क तक ले जाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय राजनेता और प्रत्याशी बड़े-बड़े वादे लेकर गांव में आते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब कुछ भूल जाते हैं। गांव में करीब 100 मतदाता हैं, जिन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने सड़क निर्माण की मांग उठाई है, लेकिन हर बार उन्हें केवल झूठे आश्वासन ही मिले हैं। सड़क न होने के कारण न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हैं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और किसानों की आजीविका पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है।
किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और रोजमर्रा का जरूरी सामान भी गांव तक नहीं पहुंच पाता है। अब तीनतरवा गांव के लोगों का सब्र जवाब दे चुका है और वे खोखले आश्वासनों से तंग आ चुके हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें अब केवल वादे नहीं, बल्कि धरातल पर सड़क निर्माण का कार्य चाहिए, ताकि उनकी जिंदगी की रफ्तार भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।





