

"झारखंड के गढ़वा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ईरानी मूल के बताए जाने वाले परिवारों के नाम सामने आए हैं, जिसके बाद प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।"
झारखंड के गढ़वा जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गढ़वा नगर परिषद के वार्ड नंबर-3 के सोनपुरवा इलाके में रहने वाले कुछ परिवारों के नाम मतदाता सूची में दर्ज पाए गए हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर ईरानी मूल का बताया जा रहा है। एसआईआर प्रक्रिया के तहत नोटिस मिलने के बाद अब इन परिवारों के सभी दस्तावेजों की गहन जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
संबंधित परिवार के सदस्यों का दावा है कि उनके पूर्वज करीब 1921 में गढ़वा आए थे और तभी से यहीं बस गए। परिवार का कहना है कि उनके पास वोटर आईडी, आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड और 1992 का जमीन का केवाला जैसे तमाम पुख्ता सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं। इसके अलावा उन्हें शहरी आवास योजना के तहत दो आवास भी मिले हैं और उनके पास वैध बिजली कनेक्शन भी है। हालांकि, परिवार के पास अलग से कोई विशेष भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण यह मामला पेचीदा बनता जा रहा है।

इस मामले के तूल पकड़ने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के मीडिया पैनलिस्ट धीरज दुबे ने इसे एक गंभीर मामला करार देते हुए चुनाव आयोग से इस पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। वहीं, गढ़वा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी का कहना है कि उनकी पार्टी ऐसे मुद्दों को पहले से ही प्रमुखता से उठाती रही है, जबकि स्थानीय वार्ड पार्षद हीरा लाल गौड़ का मानना है कि परिवार उनके जन्म से पहले से यहां रह रहा है और जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
गढ़वा के जिला निर्वाची पदाधिकारी सह उपायुक्त पीएन मिश्रा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्तमान में मतदाता सूची के प्रारूप प्रकाशन के बाद दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया चल रही है। संबंधित अधिकारी प्राप्त सभी दावों और दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहे हैं और नियमानुसार उनका निपटारा किया जाएगा। प्रशासन की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह पूरी तरह साफ हो पाएगा कि इन लोगों की मतदाता सूची में नाम बनाए रखने की पात्रता क्या है।





