

"झारखंड के गढ़वा जिले के अन्नराज डैम में भीषण गर्मी के कारण बड़ी संख्या में मछलियों के मरने का दावा किया जा रहा है, जिससे मत्स्य पालकों की चिंता बढ़ गई है।"
झारखंड के गढ़वा जिले में आदिम जनजाति के लोगों की आजीविका और आय बढ़ाने के लिए शुरू की गई केज फिशिंग योजना के सामने इस साल गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। गढ़वा सदर प्रखंड के भदुमा गांव के पास स्थित अन्नराज डैम में मत्स्य विभाग की इस पहल के तहत लगाए गए केज में बड़ी संख्या में मछलियों के मरने से मत्स्य पालकों को भारी आर्थिक नुकसान होने का दावा किया जा रहा है।
स्थानीय मत्स्य पालकों के अनुसार, इस योजना के तहत कुल 10 केज उपलब्ध कराए गए हैं जिनमें करीब 2 लाख मछलियों का पालन किया जा रहा है। मत्स्य पालक माणिक चंद कोरवा का दावा है कि इस साल भीषण गर्मी के कारण लगभग 70 हजार मछलियां मर चुकी हैं, जिससे उन्हें तगड़ा झटका लगा है और उनकी आजीविका प्रभावित हुई है।

हालांकि, मत्स्य पालकों के इस बड़े दावे से जिला मत्स्य विभाग पूरी तरह सहमत नजर नहीं आ रहा है। जिला मत्स्य पदाधिकारी पी. कापसे ने इतनी बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की बात से इनकार करते हुए कहा है कि बंगाल से लाए गए बीज की लंबी यात्रा के दौरान कुछ नुकसान स्वाभाविक है, लेकिन 70 हजार मछलियों की मौत का आंकड़ा विभाग के संज्ञान में नहीं है।
फिलहाल जिला मत्स्य विभाग इस पूरे मामले की गंभीरता से निगरानी कर रहा है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विभाग का कहना है कि वास्तविक नुकसान और मछलियों की मौत के पुख्ता कारणों का खुलासा उच्च विभागीय जांच और पूरी निगरानी के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।





