

"चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें SIR प्रक्रिया, BLO के कामकाज और ECINet की समीक्षा को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए हैं।"
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसले लिए गए हैं, जिनका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, SIR के दौरान जिन नागरिकों को अनमैप्ड या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के चलते नोटिस मिले हैं, अब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद उनके घर जाकर जरूरी दस्तावेज एकत्र करेंगे। इसके बाद इन दस्तावेजों को ECINet पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। आम तौर पर ऐसे मामलों में प्रभावित लोगों को ERO या AERO के दफ्तर में सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर केवल ऑनलाइन माध्यम से ही सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा, मजदूरों, बेघरों और रात में आश्रय लेने वाले गरीबों के लिए विशेष कैंप व हेल्प डेस्क लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

चुनाव आयोग ने तकनीकी पारदर्शिता बढ़ाते हुए ECINet सिस्टम की गहन समीक्षा का भी बड़ा निर्णय लिया है। वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में गठित होने वाली इस समिति में IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि पूरा सिस्टम चुनावी कानूनों और नियमों के बिल्कुल अनुरूप काम कर रहा है। साथ ही, दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने तथा उनके निस्तारण की समयसीमा में भी बड़ी राहत देते हुए डेडलाइन बढ़ा दी गई है।
आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित देश के 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR का काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। जिन लोगों के नाम इस प्रक्रिया में छूट गए हैं, वे निरंतर अपडेट प्रक्रिया के तहत अपने संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकते हैं। Truth24x7 की इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग चुनावी प्रक्रिया को और अधिक सुगम, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने के लिए लगातार कड़े कदम उठा रहा है।




