

"विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को परिवार का प्यार और सुरक्षा दिलाने के लिए रांची में CARA की पांचवीं क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।"
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को परिवार का प्यार, सुरक्षा और अपनत्व दिलाने के लिए रांची में एक अहम और सराहनीय पहल की गई है। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की पांचवीं क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला में दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण का दायरा बढ़ाने और इसकी प्रक्रिया में आने वाली तमाम प्रशासनिक व कानूनी बाधाओं को दूर करने पर विशेष जोर दिया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के करीब 115 जिलों से लगभग 175 प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्य करने वाले CARA ने झारखंड सरकार और राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (SARA) के सहयोग से इस आयोजन को मूर्त रूप दिया। इसका मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए परिवार आधारित देखभाल को मजबूत करना और उन्हें एक सुरक्षित, स्थायी एवं स्नेहपूर्ण परिवार उपलब्ध कराने के अवसरों को बढ़ाना था। चर्चा के दौरान बच्चों के चिकित्सकीय आकलन, कानूनी प्रक्रियाओं और शिकायत निवारण जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए CARA की CEO भावना सक्सेना ने जागरूकता और विभिन्न हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से अब तक हुई प्रगति को रेखांकित किया। वहीं, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग (DWCD&SS) के सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा कि ऐसे बच्चों को पारिवारिक जीवन और अपनत्व के समान अवसर देने के लिए केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए निरंतर और परिणामोन्मुखी ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के सफल दत्तक ग्रहण पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र फिल्म का भी अनावरण किया गया, जिसके जरिए यह संदेश दिया गया कि एक स्नेहपूर्ण परिवार बच्चों को स्थायी अपनत्व देता है। इस कार्यशाला में राज्य दिव्यांगजन आयुक्त कीर्ति श्री जी, समाज कल्याण निदेशक किरण पासी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनके सुझावों के आधार पर भविष्य में दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया जाएगा।





