

"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान 15 द्विपक्षीय मुलाकातों के जरिए वैश्विक मंच पर भारत की रणनीतिक स्थिति को और अधिक मजबूत किया है।"
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कूटनीतिक रूप से अत्यंत सफल रहा है। महज तीन दिनों के भीतर 15 औपचारिक द्विपक्षीय मुलाकातों के जरिए उन्होंने भारत की सक्रिय विदेश नीति का एक नया अध्याय लिखा है। रूस, चीन, ईरान से लेकर अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के नेताओं के साथ चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत वैश्विक पटल पर एक सेतु की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है और अपने रणनीतिक हितों को साधने में जुटा है।
इन मुलाकातों में सबसे महत्वपूर्ण चर्चा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ रही, जहां रक्षा और ऊर्जा के अलावा अंतरिक्ष और औद्योगिक सहयोग पर विशेष जोर दिया गया। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक को सीमा पर तनाव के बाद रिश्तों में स्थिरता लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। ये वार्ताएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत और चीन प्रतिस्पर्धा के बीच भी संवाद का रास्ता खुला रखने की नीति पर काम कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया की मौजूदा अस्थिरता के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ पीएम मोदी की बातचीत क्षेत्रीय शांति और समुद्री व्यापार सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम रही। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि इस क्षेत्र में स्थिरता के लिए कूटनीति ही एकमात्र समाधान है। इसके अतिरिक्त, ग्लोबल साउथ के देशों के साथ संवाद ने यह साबित किया है कि भारत विकासशील देशों की आवाज बनकर उभर रहा है और तकनीकी व व्यापारिक सहयोग को नई गति देने का प्रयास कर रहा है।
निष्कर्ष के तौर पर, इन 15 बैठकों का असली प्रभाव अब धरातल पर नजर आने वाले समझौतों और रणनीतिक निवेशों से तय होगा। कूटनीतिक कवायद का अगला चरण इन मुलाकातों को ठोस परिणामों में बदलना है, जो भारत की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हो सकें। आने वाले समय में यही परिणाम प्रधानमंत्री की इस कूटनीतिक सक्रियता की वास्तविक सफलता का पैमाना होंगे।


