

"झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली और छात्रों पर दर्ज मुकदमों के विरोध में भाजपा ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।"
झारखंड की राजनीति में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उबाल जारी है। भाजपा ने JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और आंदोलनरत छात्रों पर दर्ज मुकदमों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटों के भीतर छात्रों को न्याय नहीं मिला, तो भाजपा सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में पार्टी ने आरोप लगाया है कि राज्य भर में 1,000 से अधिक छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। भाजपा की मांग है कि ये मुकदमे तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएं। पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इस विवाद में अब CBI जांच की मांग भी जोर पकड़ रही है। भाजपा का कहना है कि गड़बड़ी के मामलों में सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि आयोग के सदस्यों और उच्च अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी ने रांची, गिरिडीह, चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ जैसे जिलों में छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाकर सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आगामी समय में राज्य सरकार का रुख क्या होगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। फिलहाल गेंद सरकार के पाले में है, जिसे अब यह तय करना है कि वह छात्रों की मांगों पर क्या कार्रवाई करती है। यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर कोई समाधान नहीं निकलता है, तो झारखंड में एक बार फिर बड़ा सियासी और छात्र आंदोलन देखने को मिल सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य प्रशासन की होगी।





