

"झारखंड में संशोधित MMDR एक्ट को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। बीजेपी ने जेएमएम और कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने के लिए 19 से 30 सितंबर तक प्रदेशव्यापी जागरूकता अभियान चलाने का ऐलान किया है।"
झारखंड में संशोधित एमएमडीआर (MMDR) एक्ट, 2026 को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्यभर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि पार्टी 19 से 30 सितंबर तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, नुक्कड़ सभा, गोष्ठियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ता जनता के बीच कानून के तथ्यों और प्रावधानों को रखेंगे।
अभियान की विधिवत शुरुआत 19 सितंबर को जमशेदपुर में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ होगी। बीजेपी का मुख्य उद्देश्य इस अभियान के जरिए आम जनता को संशोधित कानून की सही जानकारी देना और जेएमएम तथा कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम का तथ्यात्मक जवाब देना है। आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं, जिसका पर्दाफाश बीजेपी जनता के बीच जाकर करेगी।

दूसरी ओर, जेएमएम ने भी इस संशोधित कानून के विरोध में झारखंड के विभिन्न प्रखंडों में प्रदर्शन कर अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। जेएमएम नेताओं का तर्क है कि यह कानून राज्य के हितों के खिलाफ है। इसके विपरीत, केंद्र सरकार का यह दावा है कि एमएमडीआर अमेंडमेंट एक्ट का मकसद खनन क्षेत्र में निवेश और स्थिरता को बढ़ावा देना है, और खनन से मिलने वाले राजस्व का करीब 90 फीसदी हिस्सा राज्यों को मिलता रहेगा।
झारखंड एक खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, जिसके चलते यहां खनन से जुड़े कानून हमेशा से संवेदनशील राजनीतिक मुद्दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि बीजेपी के इस जागरूकता अभियान और जेएमएम के विरोध प्रदर्शन के बीच राज्य की जनता किस तरह इन राजनीतिक दांव-पेंच को देखती है। यह मुद्दा आने वाले समय में झारखंड की राजनीति में और अधिक तूल पकड़ सकता है।





