

"स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड की समृद्ध विरासत को आधुनिक विकास से जोड़ने का खाका खींचा और युवाओं को भविष्य का आधार बताया।"
स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर रांची में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के भविष्य के लिए एक व्यापक विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड की पहचान मात्र खनिज संपदा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी चेतना, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान का केंद्र है।
मुख्यमंत्री ने बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, तिलका मांझी और फूलो-झानो जैसे वीर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि उनकी संघर्ष गाथा आज भी राज्य के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्षों को याद करते हुए उनके द्वारा शुरू की गई अधिकारों की लड़ाई को झारखंड की नींव बताया।
भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि आगामी 25 वर्षों में झारखंड को आधुनिक शिक्षा, तकनीक और उद्यमिता के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना होगा। सरकार का लक्ष्य लघु वनोपज, लाह, तसर और औषधीय पौधों को वैल्यू एडिशन और ब्रांडिंग के जरिए वैश्विक बाजार तक पहुंचाना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
अंत में, मुख्यमंत्री ने झारखंड के युवाओं को राज्य की सबसे बड़ी ताकत करार दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षित, कौशल से लैस और आत्मविश्वास से भरे युवा ही आधुनिकता और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर एक प्रगतिशील झारखंड का निर्माण करेंगे।





