

"झारखंड में JSSC-CGL भर्ती परीक्षा विवाद पर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार के बदलते हलफनामों पर सवाल उठाते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।"
झारखंड में JSSC-CGL भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य सरकार की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल हालिया जवाबी हलफनामे में पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाने के बाद, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार को आड़े हाथों लिया है और तीखे सवाल पूछे हैं।
मरांडी ने सवाल उठाया है कि अगर सरकार अब यह मान रही है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया ही दूषित थी, तो पहले अदालत के सामने क्या तथ्य रखे गए थे और उस समय यह गड़बड़ी सामने क्यों नहीं आई थी? उन्होंने सरकार के इन अलग-अलग रुख को लेकर इसकी जवाबदेही तय करने की मांग की है।

नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे मामले में सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी थी, तो शुरुआती जांच सही दिशा में क्यों नहीं आगे बढ़ी और सरकार ने पहले अदालत में पूरी जानकारी क्यों छिपाई।
बता दें कि 18 सितंबर को दाखिल हलफनामे में सरकार ने चयन प्रक्रिया रद्द करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि अनुचित लाभ पाने वालों और निष्पक्ष सफल अभ्यर्थियों को अलग करना मुश्किल है। इस बीच, हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर के लिए तय की है, जबकि मरांडी ने लाखों युवाओं के भविष्य को देखते हुए इसकी सीबीआई जांच की मांग दोहराई है।





