

"झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर 288 बालू घाटों के बंद रहने, होल्डिंग टैक्स वसूली रुकने और सड़क परियोजनाओं में देरी पर तीखे सवाल उठाए हैं।"
झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए बालू घाटों के संचालन, होल्डिंग टैक्स वसूली और प्रमुख सड़क परियोजनाओं के ठप होने पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार से इस पूरी स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने और जनता को जवाब देने की मांग की है।
बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में दावा किया है कि राज्य में 302 बालू घाटों की नीलामी की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर 288 बालू घाट पूरी तरह से बंद पड़े हैं। उन्होंने पर्यावरणीय स्वीकृति, ग्रामसभा की अनुमति और प्रशासनिक औपचारिकताओं में हो रही देरी को लेकर विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस स्थिति के कारण वैध आपूर्ति ठप है और अवैध बालू के कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है।

बालू के अलावा भाजपा नेता ने होल्डिंग टैक्स वसूली ठप होने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया है। मरांडी के अनुसार, राज्य में पिछले कुछ समय से होल्डिंग टैक्स की वसूली पूरी तरह से बंद है और सरकार ने अब तक इसके लिए कोई वैकल्पिक या स्पष्ट व्यवस्था लागू नहीं की है। इसके साथ ही उन्होंने रांची में चल रही 1,410 करोड़ रुपये की विभिन्न सड़क परियोजनाओं की धीमी रफ्तार और प्रगति रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी पुरजोर मांग की है।
इन सभी मुद्दों को लेकर बाबूलाल मरांडी ने सरकार के सामने कुल आठ सूत्रीय मांगें रखी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकार को इन मामलों पर तुरंत संज्ञान लेते हुए राजस्व नुकसान का ब्योरा देना चाहिए और दोषी अधिकारियों व संवेदकों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। बहरहाल, विपक्ष के इन तीखे तेवरों से राज्य की सियासत गरमा गई है और अब सबकी निगाहें हेमंत सोरेन सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।





