

"जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित रेस्टोरेंट में हुई गोलीबारी को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों की पोस्टिंग और राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।"
जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में हुई गोलीबारी की घटना के बाद झारखंड की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस सनसनीखेज वारदात को लेकर राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए हैं। शनिवार को हुई इस गोलीबारी में चार लोग घायल हो गए थे, जबकि हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग करते हुए करीब 11 राउंड गोलियां चलाई थीं। इस मामले में पुलिस ने एसआईटी का गठन कर दिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की जा रही है।
सोशल मीडिया पर अपने एक कड़े संदेश में बाबूलाल मरांडी ने राज्य में आम नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दिनदहाड़े हुई इस गोलीबारी ने यह साबित कर दिया है कि झारखंड में कानून का राज कमजोर हो रहा है। मरांडी ने तंज कसते हुए कहा कि कभी आपराधिक वारदातों के लिए चर्चा में रहने वाला धनबाद अब पीछे छूट गया है और वैसी ही घटनाएं राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में भी आम हो चली हैं, जिससे आम जनता खुद को बेहद असुरक्षित महसूस कर रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस के शीर्ष पदों पर नियुक्तियों और अधिकारियों को दिए जा रहे अतिरिक्त प्रभार को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस विभाग में मेरिट और अनुभव के बजाय राजनीतिक नजदीकियों को प्राथमिकता दी जा रही है। मरांडी ने रांची, दुमका और सीआईडी समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात अधिकारियों के प्रभार और पूर्व केिय गएकार्यों पर सवाल उठाते हुए पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मनमाने तरीके से हो रही पोस्टिंग का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर हमला बोलते हुए मरांडी ने कहा कि केवल घटना के बाद पुलिस अधिकारियों को मौके पर भेज देना ही सुशासन नहीं कहलाता है। उन्होंने अपराधियों की तुरंत गिरफ्तारी और उनके संरक्षण में छिपे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की मांग की। पुलिस इस मामले में आपसी रंजिश और जमीन कारोबार से जुड़े विवादों के एंगल से भी जांच कर रही है, लेकिन विपक्ष के इन तीखे हमलों के बाद राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल काफी बढ़ गई है।





