Uttar Pradesh
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अयोध्या राम मंदिर को मिला पहला CEO: पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा संभालेंगे मंदिर की कमान

Published on September 3, 2026
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अयोध्या राम मंदिर को मिला पहला CEO: पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा संभालेंगे मंदिर की कमान
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"श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला सीईओ नियुक्त किया है, जो मंदिर की प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था को नया स्वरूप देंगे।"

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्था और प्रबंधन को अधिक पेशेवर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। करीब चार दशकों तक देश की सुरक्षा में तैनात रहने वाले जितेंद्र मिश्रा अब रामलला के भव्य मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्थाओं का कुशल संचालन करेंगे।

जितेंद्र मिश्रा का करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उत्तर प्रदेश के देवरिया से ताल्लुक रखने वाले मिश्रा ने 1986 में वायुसेना में बतौर फाइटर पायलट शुरुआत की थी। 39 वर्षों की लंबी सेवा के बाद, उन्होंने इस वर्ष अप्रैल में सेवानिवृत्ति ली। अपने करियर के दौरान उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली और 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में अहम भूमिका निभाई। अब इसी प्रशासनिक अनुभव का उपयोग अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट ने यह महत्वपूर्ण फैसला तब लिया है जब मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या तेजी से बढ़ी है और परिसर की सुरक्षा व प्रबंधन को लेकर एक जवाबदेह ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। हाल ही में चढ़ावे से जुड़ी घटनाओं के बाद इस पद का महत्व और बढ़ गया था। इस पद के लिए प्रक्रिया काफी कड़ी थी, जिसमें लगभग 5,585 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। कड़े साक्षात्कार और स्क्रीनिंग के बाद, जितेंद्र मिश्रा के अनुभव और नेतृत्व क्षमता पर ट्रस्ट ने अपनी मुहर लगाई।

जितेंद्र मिश्रा के साथ ही मंदिर ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टी—महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और डॉ. निर्मला यादव को भी शामिल किया है। मंदिर प्रशासन में हो रहे ये बदलाव भविष्य में आने वाली चुनौतियों और मंदिर की भव्यता के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं। अब देखना यह होगा कि पूर्व एयर मार्शल का सैन्य अनुभव मंदिर की व्यवस्थाओं को किस तरह के अनुशासित और आधुनिक स्वरूप में ढालता है।

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