

"अरुणाचल प्रदेश के ताकसिंग क्षेत्र में भारत और चीन के बीच प्रस्तावित कमांडर स्तर की बातचीत को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार की नीति और पारदर्शिता पर तीखे सवाल उठाए हैं।"
अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत और चीन के स्थानीय सैन्य कमांडरों के बीच बातचीत की खबरें सामने आई हैं। यह घटनाक्रम हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में हुई उच्च-स्तरीय सीमा वार्ता के बाद सामने आया है। इस बैठक का उद्देश्य सीमा पर उभरने वाली किसी भी स्थिति को मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्र के माध्यम से तत्काल हल करना है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए तीखे सवाल किए हैं। खेड़ा का आरोप है कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन की गतिविधियों पर स्पष्टता नहीं बरत रही है। इससे पहले भी उन्होंने अगस्त महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चीन द्वारा भारतीय मानचित्रों में किए गए कथित बदलावों पर सार्वजनिक आपत्ति दर्ज कराने की मांग की थी। कांग्रेस का तर्क है कि सीमा नीति को लेकर पारदर्शिता की कमी सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता में यह सहमति बनी थी कि सीमा पर तनाव को कम करने के लिए अतिरिक्त हॉटलाइन और बैठक के लिए नए बिंदु स्थापित किए जाएंगे। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कमांडर स्तर की बातचीत के जरिए टकराव को टालना है। हालांकि, भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में किसी भी नए अतिक्रमण या चीनी सैन्य शिविरों के निर्माण की खबरों को पहले ही सिरे से खारिज कर दिया है।
ताकसिंग क्षेत्र में चीन की कथित गतिविधियों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे सरकार की कमजोर विदेश नीति और सीमा प्रबंधन की विफलता के रूप में देख रहे हैं। जबकि सरकार का दावा है कि सीमा पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक मंचों पर और अधिक गरमाने के आसार हैं, क्योंकि देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सवाल सर्वोपरि है।




